जग जबकुरुक्षेत्र बनेगा।
जग जबकुरुक्षेत्र बनेगा। कवी - न. र. मतोंडकर (शिवदास) लाचार धरती, लाचार जीवन बनेगा, संपूर्ण सजीव रूप निर्जीव बनेगा। हर एक चेहरा कुरुप बनेगा, यह जग जब कुरुक्षेत्र बनेगा।। विषाणु राक्षस से मचा है कोहराम, शीघ्र विकास से रचा है हराम । लोभी आकांक्षाओ का परिणाम है त्राहिमाम, महाशक्ती की लोभ ने किया है यह काम ।। युध्द के परिणाम से हाहाकार मचेगा, दहाड से ज्यादा लंगड़ा नाच दिखेगा। एक- एक तंतु जंतु बनेगा, शर्म से हर एक राष्ट्रध्वज झुकेगा।। कुछ क्षण है बाकी अंहकार मिटाओ, शत्रुता भूलकर मित्रता को गले मिलाओ । कल की उपज को क्षण में ना मिटाओ, विश्व की रक्षा करने हात मिलाओ ।।