अवांछित अपेक्षाएं-एक भ्रष्टाचार घर-परिवार से
लेखक : एन. आर. मतोंडकर (शिवदास) अवांछित अपेक्षाएं-एक भ्रष्टाचार घर-परिवार से भारत में सामाजिक भ्रष्टाचार के किस्से देखे जाएं तो एक नहीं कई तरह के पाए जाते हैं और कोई एक-दूसरे के कमतर नहीं जान पड़ता है।इन भ्रष्टाचारों की वजह निजि स्वार्थ,लोभ,भौतिकवाद,शार्टकट तरीके से सबकुछ हातीया लेना आदि रहते है तथा और भी कई कारण हो सकते है। मानसकि विकृतियाँ के चलते कई परिवारों में दरारें आ चुकी हैं, परिवार का हर सदस्य परेशान सा, व्याकुल सा लगने लगा है।परिवारीक उलझनों एवं बिना मेहनत अपनी उम्मीदें हांसिल करने हेतु सुख-शांति खोता जा रहा है। ऐसी मनस्थिती में वह समाज में फैले ढोंगी बाबाओं, तांत्रिकों के चंगुल में फंसकर अपना सारा धन और परिवार का सुख चैन गवां बैठता है । एक गलत कदम के चलते वह अपने पूरे परिवार की सुख-शांति दांव पर लगा देता है । उसे यह ज्ञात नहीं है कि स्वय के सिवाय अपने दुःख...