Posts

Showing posts from April, 2023

प्राणवायु और जीवन प्रणाली

Image
    प्राणवायु और जीवन प्रणाली लेखक - न. र. मतोंडकर (शिवदास)     समस्त ब्रम्हाण्ड में स्थित अनेकानेक आकश गंगाएं उनके चुंबकीय क्षेत्र में कई सौर मंडल और उन सौर मंडलों में अपनी-अपनी क्षमतानुसार तारे, ग्रह-नक्षत्र, उपग्रह, धूमकेतु आदि अनेकानेक रहस्यों से भरा यह चुंबकीय चक्र अरबों-खरबों वर्षों से कार्यरत है । यह एक सुंदर, अद्भूतरचनात्मक है। इस रचना की शुरूआत और अंत का ठाव ठीकाना लगाना एक कल्पना ही रही है ।    माना जाता है कि यह पुरा रचनाक्रम ब्रम्हाण्ड में स्थित दो महाभयंकर जड़ आकृतियों के टकराने से हुआ है और यही कारण हो सकता है इन सब आकाश गंगाओं का प्रकट होना । उन दो महान आकृतियों का विस्फोट इतना जबरदस्त था कि वो दोनों भाग आपस में टकराकर छिन्न-भिन्न हो गए। उनके छर्रे उड़ गए और उनके आपस में टकराने की घर्षण से (+) अधिक (-) कम जैसे चुंबकीय ऊर्जा की उत्पत्ति होने लगी । ये भाग आपस में जितने संबंधित होते रहते हैं, उतनी ही तेजी से अणु प्रसार होते रहते हैं और उतना ही दमदार उनसे गुरुत्वाकर्षण का भाव होते रहता है। ये अणु जितनी गति से तैयार होते हैं, उतनी ही तीव्र गति...