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Showing posts from September, 2022

और मैं बोल पड़ा ( पेड़ की आत्मकथा)

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  लेखक- न. र. मतोंडकर (शिवदास)                     पर्यावरण विशेष लेख और मैं बोल पड़ा ( पेड़ की आत्मकथा) सुबह-सवेरे जब मेरी नींद खुली तो कई की सुरीली आवाजों ने मेरा मन मोह लिया। साथ-साथ मंद-मंद बहती बयार ने मेरी टहनियों को हिला डुलाकर सब पत्तों में रोमांच भर दिया में बड़ी खुशहाली से उन पंछियों की तरह-तरह की आवाजों का आनंद उठा रहा था। परन्तु इन मधुर आवाज के कलरव में कागराज की कर्कश आवाज ने जहर घोल दिया जिससे मेरा चित्त बिखर गया। मुझे उन आवाजों से घृणा होने लगी। मैंने तेज हवा के बहाव का सहारा लेकर अपनी टहनियों को जोर से हिलाकर कागराज को भगाने की कोशिश की मगर अफसोस वे उड़कर जाते और तुरन्त लौटकर वापस मेरे उपर बैठ जाते हैं। आखिरकार मेरी सब कोशिश बेकार गई तब मेरा ध्यान उनकी बातों की ओर आकर्षित होने लगा। जब ध्यान लगाकर उनकी बातों को सुनने की काशिश की तो मुझे ज्ञात हुआ कि वे सब मिलकर एक बुजुर्ग के खिलाफ अभियान छेड़ने का सलाह मशविरा कर रहे थे। वे कह रहे थे कि यह बुजुर्ग हमेशा हमें और इस पेड़ को सताता है। हमें देखते ही वह हमारे उपर कंकर पत्थर...

अभीशाप

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  कवि- एन. आर. मातोंडकर                                           अभीशाप                                                                             जग शिल्पी ने बनाई है,                                      सुंदर रचना संसार की ।।                                      जन-जीवों के पालन में,                                            बनाई छाव वृक्षशाला की ॥           ...

ध्वनि प्रदुषण

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                कवि- न. र. मतोंडकर . (शिवदास)                             मडगाव - गोंय                                                                            ध्वनि प्रदुषण       भौर हुई तो मुर्गे ने किया इशारा,       इशारा सुनते ही काकराज ने मुझे पुकारा ।।        कोयल बोली, देख रहा सपना दुलारा,        मैंना कहे, मत उठा, अभी है अंधियारा   ।।                                             चिडिया ने कहा "है वह कल का सितारा",          तोता चहका "उठो बना है चमन हरा-भरा ।...