रहस्य


रहस्य 

है हमारा देश सर्वधर्म ,

सदभावना की नाव का।

रखता है दिल में उमंग

          मानवता की रहस्य का।          !!!!

 

रखी है हमने नींव ,

रीती और रिवाज की।

 लाखों वर्षों की संस्कृति को

         बरकरार रखने चाहत की।        !!!!

 

रही सबकी महत्वकांक्षा ,

चमन में हो फूलों की बौछार।

मिल जाए इसकी खुशबु ,

           संपूर्ण विश्व सदाबहार।              !!!!

 

मांग रहा हूँ मैं यह दुआ,

राम ,रहीम ,ईसा की दुलरों से।

अगर न रहा मैं इसकी काबिल ,

       तो उठा ले मुझे इस दुनया से।       !!!!

 

 


                                                                                                    

                                                                                                      कवी : - एन. आर. मातोंडकर (शिवदास) 
                                                                                                                                             मडगांव , गोवा



संदर्भ चित्र :- 
https://pixels.com/featured/religion-should-be-the-cause-of-love-and-agreement-shahram-soltani.html





Comments

  1. वाह क्या बात है बहुत सुन्दर और अच्छा मंच अपने आप को लोगों तक पहुंच ने के लिए, अगली कविता का इंतजार रहेगा

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