रहस्य
रहस्य
है हमारा देश सर्वधर्म ,
सदभावना की नाव का।
रखता
है दिल में उमंग
मानवता
की रहस्य का।
!!१!!
रखी
है हमने नींव ,
रीती
और रिवाज की।
लाखों
वर्षों की संस्कृति को
बरकरार
रखने चाहत की।
!!२!!
रही
सबकी महत्वकांक्षा ,
चमन
में हो फूलों की बौछार।
मिल
जाए इसकी खुशबु ,
संपूर्ण
विश्व सदाबहार।
!!३!!
मांग
रहा हूँ मैं यह दुआ,
राम ,रहीम ,ईसा की दुलरों से।
अगर न
रहा मैं इसकी काबिल ,
तो
उठा ले मुझे इस दुनया से। !!४!!
कवी : - एन. आर. मातोंडकर (शिवदास)
मडगांव , गोवा
संदर्भ चित्र :-
https://pixels.com/featured/religion-should-be-the-cause-of-love-and-agreement-shahram-soltani.html

सुंदर रचना
ReplyDeleteवाह क्या बात है बहुत सुन्दर और अच्छा मंच अपने आप को लोगों तक पहुंच ने के लिए, अगली कविता का इंतजार रहेगा
ReplyDeleteNice Poem👌
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